कहा जाता है कि - ये सजा सुनाये जाने पर, मलेरकोटला के नबाब शेर मुहम्मद खान ने कहा था कि - हमारी दुश्मनी इनके पिता से है, मैं जंग का बदला जंग में लूंगा, इन बच्चों को मारकर नहीं. परन्तु शेर मुहम्मद की बात को अन्य सभी नबाबो ने काट दिया और फिर मलेरकोटला का नबाब शेर मुहम्मद खान भी खामोश हो गया.
Friday, 6 January 2023
मलेरकोटला वालों की शराफत का सच
कहा जाता है कि - ये सजा सुनाये जाने पर, मलेरकोटला के नबाब शेर मुहम्मद खान ने कहा था कि - हमारी दुश्मनी इनके पिता से है, मैं जंग का बदला जंग में लूंगा, इन बच्चों को मारकर नहीं. परन्तु शेर मुहम्मद की बात को अन्य सभी नबाबो ने काट दिया और फिर मलेरकोटला का नबाब शेर मुहम्मद खान भी खामोश हो गया.
Wednesday, 14 December 2022
क्या है "मैं पठान का बच्चा हूं, मैं सच्चा बोलता हूं, सच्चा करता हूं" का सच
अंध विरोधियों द्वारा सोशल मीडिया पर मोदी के भाषण की एक 9 सेकण्ड की क्लिप वायरल की जा रही है जिसमे मोदीजी कह रहे हैं कि - मैं पठान का बच्चा हूं, मैं सच्चा बोलता हूं सच्चा करता हूं. 9 सेकण्ड की इस वीडियो क्लिप के जरिए अंधविरोधी खासकर मुसलमान मोदी जी का मजाक बनाने में लगे है और बिना सच जाने इसे आगे बढ़ा रहे हैं.
Friday, 9 December 2022
महान क्रांतिकारी "पं.राम प्रसाद विस्मिल"
महान क्रांतिकारी रामप्रसाद विस्मिल का जन्म 11 जून 1897 को उत्तरप्रदेश के शाहजहांपुर में हुआ था. नाम में पंडित शब्द लगा होने से उनके ब्राह्मण होने का भ्रम होता है. उनके दादा जी नारायण लाल तोमर जाति के क्षत्रिय थे किन्तु उनके आचार-विचार, सत्यनिष्ठा व धार्मिक प्रवृत्ति से कारण उन्हें "पण्डित जी" ही कहकर सम्बोधित करते थे.
Saturday, 3 December 2022
आपरेशन ट्राइडेंट
पापिस्तान ने 3 दिसंबर 1971. को भारत पर हमला किया था. लेकिन अगले ही दिन 4 दिसंबर को भारत ने पापिस्तान को घुटनों पर ला दिया. 4 दिसंबर को थलसेना ने लोंगोवाला में पापिस्तान की टैंक ब्रिगेड की कब्रगाह बना दी थी और 5 दिसंबर की सुबह भारतीय वायु सेना ने बची हुई टैंक ब्रिगेड को तबाह कर पापिस्तान में दहशत फैला दी थी.
4 दिसंबर को ही बंगाल की खाड़ी में भारतीय युद्धपोत "आईएनएस राजपूत" ने पपिस्तान के सबसे खतरनाक हथियार "PNS गाजी" पनडुब्बी को डुबो दिया था. हालांकि "PNS गाजी" से अमेरिका की प्रतिष्ठा जुडी होने के कारण भारत ने इसका आधिकारिक जिक्र नहीं किया लेकिन भारतीय नौ सेना दिवस चुनने में इस घटना का बहुत बड़ा नह्त्व है..
4 दिसंबर को भारत का नौसेना दिवस है. नौसेना दिवस के लिए 4 दिसंबर की तारीख को चुनने की एक ख़ास बजह और है. 4 दिसंबर 1971 को भारतीय नौसेना ने कराची बंदरगाह पर स्थित, नौसेना मुख्यालय पर हमला कर, उसे तवाह कर पापिस्तानी नौसेना की कमर तोड़ दी थी. यह भारतीय नौसेना का अब तक का सबसे खतरनाक हमला था.
भारतीय नेवी ने पाकिस्तान नेवी के कराची बंदरगाह स्थित मुख्यालय को निशाना बनाकर हमला बोला था. नौसेना के इस हमले को "आप्रेसन ट्राइडेंट" का नाम दिया गया था. ट्राइडेंट का मतलब होता है त्रिशूल. इसमें 3 मिसाइल बोट्स का इस्तेमाल किया गया था, जिनके नाम थे- "आईएनएस निपट", "आईएनएस निर्घट" और "आईएनएस वीर".
नौसेना प्रमुख एडमिरल "एस.एम.नंदा" के नेतृत्व में ऑपरेशन ट्राइडेंट का प्लान बनाया गया था. इस टास्क की जिम्मेदारी 25वीं स्क्वॉर्डन कमांडर "बब्रभान यादव" को दी गई थी. आपरेशन के दौरान बब्रभान यादव खुद भी "आईएनएस निपट" पर मौजूद रहे. इस यु्द्ध में पहली बार जहाज पर मार करने वाली एंटी शिप मिसाइल से हमला किया गया था.
4 दिसंबर 1971,रात 9 बजे, भारतीय नौसेना ने कराची की तरफ बढ़ना शुरू किया. रात 10:30 पर कराची बंदरगाह पर पहली मिसाइल दागी गई. 90 मिनट के भीतर पाकिस्तान के 3 नेवी शिप ( पी.एन.एस. खैबर, पीएनएस चैलेंजर और पीएनएस मुहाफिज ) डूब गए और 2 बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए. कराची तेल डिपो आग शोलों में घिर गया था.
सफल हमले के बाद कमांडर बब्रभान यादव ने अपने उच्च अधिकारी "विजय जेरथ" को संदेश भेजा कि- "इससे अच्छी दिवाली हमने आज तक नहीं देखी". इस पुरे हमले में भारत को किसी तरह का कोई नुकसान नहीं हुआ. इसे भारतीय नौसेना का सबसे सफल हमला माना जाता है. इसलिए इस जीत की याद में 4- दिसंबर को नौसेना दिवस मनाया जाता हैं.
लोंगोवाला युद्ध
राजस्थान के जैसलमेर जिले में, लोंगोवाला पोस्ट पर हुआ भारत - पापिस्तान का युद्ध, दुनिया के दुर्लभ युद्दों में गिना जाता है. इस लड़ाई में पापिस्तान के 3,000 सैनिकों वाली टैंक ब्रिगेड को, भारतीय सेना के 123 जवानो ने नेस्तनाबूत कर दिया था. इसी घटना पर निर्माता निर्देशक "जे पी दत्ता" ने एक भव्य फिल्म "बार्डर" का निर्माण भी किया था.
पापिस्तान सरकार ने विरोधी नेता "शेख मुजीब्र्रह्मान" को गिरफ्तार पूर्वी पापिस्तान में दमनचक्र चला रखा था. बेकसूरों को मारा जा रहा था महिलाओं का बलात्कार किया जा रहा था, ऐसे में सेना का बिरोध करने वहां "मुक्तिवाहिनी" खड़ी हुई. इसमें बंगाली सैनिक भी शामिल हो गए. भारत सरकार ने भी मुक्तिवाहिनी को अपना समर्थन दे दिया.
भारत को रोकने के लिए पापिस्तान ने भारत को पश्चिम में उलझाना चाहा और 3 दिसंबर 1971 को अचानक भारत के कुछ सैन्य हवाई अड्डों (श्रीनगर, पठानकोट, अम्रतसर, जोधपुर, आगरा, आदि ) पर हवाई हमला कर बम गिराने शुरू कर दिए. इंदिरागांधी ने इसे पापिस्तान का भारत पर आक्रमण घोषित कर, जबाबी युद्ध का ऐलान कर दिया.
पापिस्तान के पास ख़ुफ़िया खबर थी कि - पश्चिम में भारतीय सेना कम है. ऐसे में उसने जैसलमेर पर कब्जा करने की रणनीति बनाई और 4 दिसंबर 1971 की रात को 3,000 सैनिको और टैंक ब्रिगेड के साथ लोंगोवाला चौकी पर हमला बोल दिया. उस समय लोंगोवाला में केवल 123 सैनिक ( 120 पंजाब रेजीमेंट के तथा 3 जवान BSF) मौजूद थे.
लोंगोवाल चौकी के इंचार्ज मेजर "कुलदीप चादपुरी" ने इस हमले की खबर हेडक्वार्टर को दी, तो उनको निर्देश दिया कि- 6 घंटे (सुबह) से पहले हवाई मदद नहीं मिल सकती. आप चाहो तो किसी तरह उनको रोको, नहीं तो वहां से निकलकर रामगढ़ आ जाओ. उन 123 जवानो ने पीठ दिखाकर भागने के बजाय, मुकाबला करने का निर्णय लिया.
भारत के वीरों ने अपनी कुछ साधारण थ्री नाट थ्री राइफलो, 2 MMG, हैण्ड ग्रेनेड और एंटी टैंक माईन्स की सहायता से पापिस्तान की सेना को धराशाई करना शुरू कर दिया. भारतीय सेना ने पपिस्तानियों का किस तरह से मुकाबला किया, यह तो आप सबने "बार्डर" फिल्म में देखा ही है. सेना ने पापिस्तान के सैकड़ों सैनिक मार दिए और 12 टैंक नष्ट कर दिए.
इसे देखकर पापिस्तान सेना ने अपने हेडक्वार्टर को मैसेज दिया कि- हमारी ख़ुफ़िया रिपोर्ट झूठी है, लगता है यहाँ पर कोई बड़ी ब्रिगेड मौजूद है. सुबह होते ही भारतीय वायुसेना भी पहुँच गई और ताबड़तोड़ हमले कर पापिस्तानियों को अपने टैंक छोधकर भागने पर मजबूर कर दिया. भारतीय वायुसेना ने पापिस्तान सीमा में घुसकर भी तांडव मचाया.
पापिस्तान के ब्रिगेडियर तारिक मीर को अपने टैंको, भारी सेना और ख़ुफ़िया रिपोर्ट पर इतना भरोसा था कि - उसने अधिकारियों से कहा था कि- हम 24 घंटे में जैसलमेर पर कब्जा कर लेंगे. उसने अपने सनिकों को बोला था "इंशाअल्लाह हम लोग नाश्ता लोंगोवाला में करेंगे, दोपहर का खाना रामगढ़ में खायेंगे और रात का खाना जैसलमेर में खायेंगे.
हालांकि उसके इस डायलाग को ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए फिल्म में कहा गया था "सुबह का नाश्ता जैसलमेर में, दोपहर का खाना जयपुर में और रात का खाना दिल्ली में". इस युद्ध में पापिस्तान के 34 टैंक ( 12 थलसेना द्वारा और 22 वायुसेना द्वारा) सहित 200 वाहन नष्ट हो गए और 500 से ज्यादा सैनिक मारे गए थे.
सारी दुनिया में ऐसा एक भी उदाहरण नहीं है जहाँ इतने कम सैनिको द्वारा इतने सारे टैंक नष्ट किये गए हों. पापिस्तान ने तीन दिसंबर को पहला हमला किया था और भारतीय सेना ने 4 दिसंबर को ही लोंगोवाला में करारी मात दी, दुसरी तरफ उसी दिन नौ सेना ने बंगाल की खाड़ी में पापिस्तानी पनडुब्बी "गाजी" को डूबोकर पापिस्तान की कमर तोड़ दी.
4 दिसंबर 1971 : सेना के तीनो अंगों लिए गौरव का दिन
3 दिसंबर 1971 को पापिस्तान ने भारत के कई शहरों पर अचानक हवाई हमला कर दिया था , जिसको उसने नाम दिया था "आपरेशन चंगेज खान" इस हमले के बाद भारत ने भी पापिस्तान से युद्ध करने की घोषणा कर दी और जबाबी हमले के लिए तैयार हो गया. भारतीय सेना तो पहले से ही तैयार थी उसे तो केवल आदेश का इन्तजार था.
आपरेशन चंगेज खान
3 दिसंबर 1971 को पापिस्तान ने भारत के 11 स्थानों ( 9 एयर बेस और 2 जगह कश्मीर में ) श्रीनगर, पठानकोट, अमृतसर, जोधपुर, आगरा, भुज, हलवारा, आदि ) पर अचानक बमबारी कर युद्ध छेड़ दिया था. भारत पर इस हमले को पापिस्तान ने "आप्रेसन चंगेज खान" नाम दिया था. भारत पर पापिस्तान के इस हमले के मुख्यतः तीन कारण माने जाते हैं.