आज दुनिया डिजिटल युग में प्रवेश कर चुकी है. मोबाइल ऐप, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन गेम, वीडियो प्लेटफॉर्म और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी तकनीकें केवल सुविधा का माध्यम नहीं रहीं, बल्कि वे किसी भी देश की आर्थिक और रणनीतिक शक्ति का आधार बन चुकी हैं.
VANDEMATRAM (वंदेमातरम्)
Friday, 15 May 2026
स्वदेशी सॉफ्टवेयर : आत्मनिर्भर भारत की नई शक्ति
Saturday, 22 November 2025
संघ गीत : हे जन्म-भूमि भारत
हे जन्म-भूमि, हे कर्म भूमि भारत
हे वन्दनीय भारत, अभिनन्दनीय भारत।।
जीवन सुमन चढ़ाकर आराधना करेंगे
तेरा जन्म-जन्म भर हम वन्दना करेंगे।
हम अर्चना करेंगे, हे जन्म-भूमि भारत
हे जन्म-भूमि भारत, हे कर्म भूमि भारत।।
महिमा महान् तू है, गौरव निधान तू है
तू प्राण है हमारी, जननी समान तू है
तेरे लिये जियेंगे, तेरे लिये मरेंगे
तेरे लिये जन्म भर, हम साधना करेंगे
हम अर्चना करेंगे, हे जन्म-भूमि भारत
हे जन्म-भूमि भारत, हे कर्म भूमि भारत।।
जिनका मुकुट हिमालय, जग जगमगा रहा है
सागर जिसे रतन की, अंजुलि चढ़ा रहा है
वह देश है हमारा, ललकार कर कहेंगे
उस देश के बिना हम, जीवित नहीं रहेंगे
हम अर्चना करेंगे, हे जन्म-भूमि भारत
हे जन्म-भूमि भारत, हे कर्म भूमि भारत।।
जो संस्कृति अभी तक दुर्जय सी बनी है
जिसका विशाल मन्दिर, आदर्श का धनी है
उसकी विजय-ध्वजा ले, हम विश्व में चलेंगे
संस्कृति सुरभि पवन, बन हर कुञ्ज में बहेंगे
हम अर्चना करेंगे, हे जन्म-भूमि भारत
हे जन्म-भूमि भारत, हे कर्म भूमि भारत।।
शाश्वत स्वतन्त्रता का,जो दीप जल रहा है
आलोक का पथिक जो, अविराम चल रहा है
विश्वास है कि पल भर, रुकने उसे न देंगे
उस दीप की शिखा को, ज्योतित सदा रखेंगे
हम अर्चना करेंगे, हे जन्म-भूमि भारत
हे जन्म-भूमि भारत, हे कर्म भूमि भारत।।
संघ गीत : मनुष्य तू बड़ा महान है
मनुष्य तु बड़ा महान है, भूल मत मनुष्य तू बड़ा महान है।।
धरती की शान तू है,
मनु की संतान,
तेरी मुठ्ठियों मे बंद तूफान है रे,
मनुष्य तू बडा महान है,
मनुष्य तु बड़ा महान है, भूल मत मनुष्य तू बड़ा महान है।।
तू जो चाहे पर्वत पहाडो को फोड दे,
तू जो चाहे नदियों के मुख को भी मोड दे,
तू जो चाहे पर्वत पहाडो को फोड दे,
तू जो चाहे नदियों के मुख को भी मोड दे,
तू जो चाहे माटी से अमृत निचोड़ दे,
तू जो चाहे धरती को अंबर से जोड दे,
अमर तेरे प्राण अमर तेरे प्राण,
मिला तुझको वरदान,
तेरी आत्मा मे स्वयं भगवान है,
तेरी आत्मा मे स्वयं भगवान है रे,
मनुष्य तु बड़ा महान है, भूल मत मनुष्य तू बड़ा महान है।।
नैनो मे ज्वाल तेरी गत मे भुचाल,
तेरी छाती मे छुपा महाकाल है,
नैनो मे ज्वाल तेरी गत मे भुचाल,
तेरी छाती मे छुपा महाकाल है,
पृथ्वी के लाल तेरी हिमगिरि सा भाग,
तेरी भ्रकुटी मे तांडव का ताल है,
निज को तू जान निज को तू जान,
जरा शक्ति पहचान,
तेरी वाणी में ओ तेरी वाणी मे,
युग का अहवान है रे,
मनुष्य तु बड़ा महान है, भूल मत मनुष्य तू बड़ा महान है।।
धरती सा भी तू है अग्नि सा भी,
तू जो चाहे काल को भी थाम ले,
धरती सा भी तू है अग्नि सा भी,
तू जो चाहे काल को भी थाम ले,
पापो का प्रलय रूके पशुता का शिश झुके,
तू जो चाहे हिम्मत से काम ले,
गुरू सा मतीमान गुरू सा मतीमान,
पवन सा गतीमान,
तेरी नभ से भी ऊंची उडान है,
ओ तेरी नब से भी ऊंची उडान है रे,
मनुष्य तु बड़ा महान है, भूल मत मनुष्य तू बड़ा महान है।।
धरती की शान तू है, मनु की संतान,
तेरी मुठ्ठियों मे बंद तूफान है रे,
मनुष्य तु बड़ा महान है, भूल मत मनुष्य तू बड़ा महान है।।
संघ गीत : जो अपने देश धर्म कौम, दे रखवाले हुंदे ने
जो अपने देश धर्म कौम दे, रखवाले हुंदे ने
ओह जीवन सफले हुंदे ने, ओह भागां वाले हुंदे ने ।।
नही रुकदे नही झुकदे,
नही थकदे नही अकदे
कोई बी भैय या परलोभन,
ओहनां नू तोड़ नहीं सकदे
वतन दिया साधकां तन मन, ऐसे ढाले हुंदे ने
ओह जीवन सफले हुंदे ने, ओह भागां वाले हुंदे ने
जो अपने देश धर्म कौम दे, रखवाले हुंदे ने
ओह जीवन सफले हुंदे ने, ओह भागां वाले हुंदे ने ।।
उबलदिआं देगां, तत्तीआं तवीआं,
आरे, रंबीआं, चरखडीआं
जो सच्च दी राह चलदे ने,
मुश्किलां आऊंदीआं बडींआं
कदे फाँसी, कदे गोली, कदे विष प्याले हुंदे ने
ओह जीवन सफले हुंदे ने, ओह भागां वाले हुंदे ने
जो अपने देश धर्म कौम दे, रखवाले हुंदे ने
ओह जीवन सफले हुंदे ने, ओह भागां वाले हुंदे ने ।।
धनी उन्हां जिन्हा कोई
नही हुंदा जमाने विच
सिदकदिलियां जुझारूपन है,
जिन्हां दे खजाने विच
जिन्हा ने शील – संयम, चाल – चलन सम्भाले हुंदे ने
ओह जीवन सफले हुंदे ने, ओह भागां वाले हुंदे ने
जो अपने देश धर्म कौम दे, रखवाले हुंदे ने
जो अपने देश धर्म कौम दे, रखवाले हुंदे ने
संघ गीत : ऐ हिन्द तेरी शान तों जाना लुटावांगे
ऐ हिन्द तेरी शान तों, जानां लुटावांगे।
दुनियां नू तेरी रक्खिया, कर के विखावांगे॥
ऐ हिन्द तेरी शान तों, जानां लुटावांगे।
दुनियां नू तेरी रक्खिया, कर के विखावांगे॥
बन्दे ने धरम रक्खिया, जीवन नू वार के,
दसवें पिता ने दस्सिया, सरवंश वार के.
रक्खी सी लाज धरम दी, अजीत जुझार ने
साडे वी सीनियां दे विच, उठ दे उबाल ने
असी लाडले दशमेश दे बण के विखांवांगे,
नियां नू तेरी रक्खिया, कर के विखावांगे॥
ऐ हिन्द तेरी शान तों, जानां लुटावांगे।
दुनियां नू तेरी रक्खिया, कर के विखावांगे॥
जालिम ने भगत सिंह नू, फांसी चढ़ा दित्ता
भारत दा शेर , आखरी नींदे सुला दित्ता
पर ओह तां हस्स के, देश तों कुरबान हों गिआ
परवानां अपणी कौम तों, बलिदान हो गिआ
कुरबानीयां दा पाठ वी , दिल नूं पढ़ावांगे
दुनियां नू तेरी रक्खिया , कर के विखावांगे॥
ऐ हिन्द तेरी शान तों, जानां लुटावांगे।
दुनियां नू तेरी रक्खिया, कर के विखावांगे॥
चमकी जो बिजली वांग , ओह झांसी दी रानी सी
जननी दे प्यार विच , जो होई दीवानी सी
दुश्मन दे मार मार के, छक्के छुड़ाए सी
घानां दे घान मार के , धरती ते लाहे सी
प्रचण्ड ओस चण्डी नूं , करके विखावांगे
दुनियां नू तेरी रक्खिया. कर के विखावांगे॥
ऐ हिन्द तेरी शान तों, जानां लुटावांगे।
दुनियां नू तेरी रक्खिया, कर के विखावांगे॥
राणा ने उमर जंगलां दे, विच गुजारी सी
खातर धर्म ते देश दे , जिन्दड़ी वी वारी सी
शिवा ने मां तों सिक्खिया , कुरबान होवना
प्यारे धर्म ते देश तों बलिदान हो वना
सारे जग ते फेर तों , भगवा लहरावांगे
दुनियां नू तेरी रक्खिया कर के विखावांगे॥
ऐ हिन्द तेरी शान तों, जानां लुटावांगे।
दुनियां नू तेरी रक्खिया, कर के विखावांगे॥
संघ गीत : चरैवेति-चरैवेति, यही तो मंत्र है अपना
चरैवेति-चरैवेति
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चरैवेति-चरैवेति, यही तो मंत्र है अपना ।
चरैवेति-चरैवेति, यही तो मंत्र है अपना ॥
नहीं रुकना, नहीं थकना,
सतत चलना सतत चलना ।
यही तो मंत्र है अपना,
शुभंकर मंत्र है अपना ॥
चरैवेति-चरैवेति, यही तो मंत्र है अपना ।
चरैवेति-चरैवेति, यही तो मंत्र है अपना ।
हमारी प्रेरणा भास्कर,
है जिनका रथ सतत चलता।
युगों से कार्यरत है जो,
सनातन है प्रबल ऊर्जा।
गति मेरा धरम है जो,
भ्रमण करना भ्रमण करना।
यही तो मंत्र है अपना,
शुभंकर मंत्र है अपना
चरैवेति-चरैवेति, यही तो मंत्र है अपना ।
चरैवेति-चरैवेति, यही तो मंत्र है अपना ॥१॥
हमारी प्रेरणा माधव,
है जिनके मार्ग पर चलना।
सभी हिन्दू सहोदर हैं,
ये जन-जन को सभी कहना।
स्मरण उनका करेंगे और,
समय दे अधिक जीवन का।
यही तो मंत्र है अपना,
शुभंकर मंत्र है अपना
चरैवेति-चरैवेति, यही तो मंत्र है अपना ।
चरैवेति-चरैवेति, यही तो मंत्र है अपना ॥२॥
हमारी प्रेरणा भारत,
है भूमि की करें पूजा।
सुजल-सुफला सदा स्नेहा,
यही तो रूप है उसका।
जिएं माता के कारण हम,
करें जीवन सफल अपना।
यही तो मंत्र है अपना,
शुभंकर मंत्र है अपना
चरैवेति-चरैवेति, यही तो मंत्र है अपना ।
चरैवेति-चरैवेति, यही तो मंत्र है अपना ॥३॥
नहीं रुकना, नहीं थकना,
सतत चलना सतत चलना ।
यही तो मंत्र है अपना,
शुभंकर मंत्र है अपना ॥
चरैवेति-चरैवेति, यही तो मंत्र है अपना ।
चरैवेति-चरैवेति, यही तो मंत्र है अपना ॥
संघ गीत : हम करें राष्ट्र आराधन
हम करें राष्ट्र-आराधन,
हम करें राष्ट्र-आराधन,
तन से, मन से, धन से,
तन-मन-धन जीवन से
हम करें राष्ट्र-आराधन,
हम करें राष्ट्र आराधन ।। 1।।
अंतर से मुख से कृति से,
निश्चल हो निर्मल मति से,
श्रद्धा से मस्तक नत से,
हम करें राष्ट्र अभिवादन
हम करें राष्ट्र आराधन
हम करें राष्ट्र आराधन ।। 2 ।।
अपने हँसते शैशव से,
अपने खिलते यौवन से,
प्रौढ़तापूर्ण जीवन से,
हम करें राष्ट्र का अर्चन
हम करें राष्ट्र आराधन
हम करें राष्ट्र आराधन ।। 3 ।।
अपने अतीत को पढ़कर,
अपना इतिहास उलटकर,
अपना भवितव्य समझकर,
हम करें राष्ट्र का चिंतन
हम करें राष्ट्र आराधन
हम करें राष्ट्र आराधन ।। 4 ।।
हमने ही उसे दिया था,
सांस्कृतिक उच्च सिंहासन,
माँ जिस पर बैठी सुख से,
करती थी जग का शासन,
हम करें राष्ट्र आराधन
हम करें राष्ट्र आराधन ।। 5 ।।
अब कालचक्र की गति से,
वह टूट गया सिंहासन
अपना तन-मन-धन देकर
हम करें पुनः संस्थापन
हम करें राष्ट्र आराधन
हम करें राष्ट्र आराधन ।। 6 ।।