Friday, 15 May 2026

स्वदेशी सॉफ्टवेयर : आत्मनिर्भर भारत की नई शक्ति

आज दुनिया डिजिटल युग में प्रवेश कर चुकी है. मोबाइल ऐप, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन गेम, वीडियो प्लेटफॉर्म और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी तकनीकें केवल सुविधा का माध्यम नहीं रहीं, बल्कि वे किसी भी देश की आर्थिक और रणनीतिक शक्ति का आधार बन चुकी हैं.

ऐसे समय में भारत के लिए यह आवश्यक हो गया है कि वह विदेशी सॉफ्टवेयर और ऐप्स पर निर्भर रहने के बजाय अपने स्वदेशी सॉफ्टवेयर और डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करे. इस कार्य में युवा इंजीनियर्स और इन्वेस्टर्स दोनों को आगे आना होगा क्योंकि प्रतिभा के साथ पैसा भी जरूरी है.
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने “स्टार्टअप इंडिया”, “मेक इन इंडिया” और “स्वदेशी अपनाओ” जैसे अभियानों के माध्यम से देश को आत्मनिर्भर बनाने का आह्वान किया है. इन अभियानों का वास्तविक उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि भारत को तकनीकी रूप से भी विश्व में अग्रणी बनाना है.

क्यों जरूरी है स्वदेशी सॉफ्टवेयर ?
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आज भारत में करोड़ों लोग विदेशी सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैं. इन सभी से होने वाली भारी कमाई विदेशी कंपनियों के पास जाती ही है, साथ ही भारत के लोगों का सारा डाटा भी इन विदेशी कंपनियों के पास पहुँच जाता है, जिसका दुरूपयोग हो सकता है.
चाहे बात फेसबुक जैसी सोशल नेटवर्किंग सेवाओं की हो, व्हाट्सएप जैसे मैसेजिंग ऐप की, यू-ट्यूब जैसे वीडियो प्लेटफॉर्म की या ऑनलाइन गेम्स की, ..... इन सभी सोशल मीडिया प्लेटफार्म के पास आज लगभग हर भारतीय का सारा डाटा है, जिसको पैसे के लिए भारत के शत्रुओं को बेचा जा सकता है.
यदि भारत के युवा इंजीनियर किसी प्रकार के स्वदेशी विकल्प तैयार करें, तो इससे कई बड़े लाभ होंगे —
देश का पैसा देश में ही रहेगा
लाखों युवाओं को रोजगार मिलेगा
भारत तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनेगा
डेटा सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी
विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम होगी
आज चीन इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. चीन ने विदेशी ऐप्स के विकल्प तैयार किए और अपने देश की कंपनियों को बढ़ावा दिया. परिणामस्वरूप आज उसकी कई टेक कंपनियाँ विश्व की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल हैं और चीन के निवासियों का डाटा भी सुरक्षित है.
भारत के पास चीन से भी अधिक युवा शक्ति और प्रतिभा मौजूद है. आवश्यकता केवल सही दिशा और समर्थन की है. हर वर्ष लाखों इंजीनियर कॉलेजों से निकलते हैं. लेकिन कोई इन्वेस्टर पैसा लगाने को तैयार नहीं है. इनके माँ बाप भी यही कहते हैं कि कहीं नौकरी कर लो.
यदि इन युवाओ को घर के साथ साथ सरकार और इन्वेस्टर्स का भी साथ मिल जाए तो ये युवा, नौकरी खोजने के बजाय, नए सॉफ्टवेयर, ऐप और डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं, और तकनीक के क्षेत्र में भारत को विश्वगुरु बना सकते हैं.
आज आवश्यकता है कि भारतीय युवा —
स्वदेशी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म विकसित करें
भारतीय संस्कृति और शिक्षा आधारित गेम तैयार करें
वीडियो शेयरिंग और मैसेजिंग ऐप्स बनाएं
भारतीय भाषाओं पर आधारित AI और सॉफ्टवेयर विकसित करें
साइबर सुरक्षा और क्लाउड टेक्नोलॉजी में स्वदेशी समाधान तैयार करें
भारत के पास प्रतिभा की कोई कमी नहीं है. हमारे इंजीनियर दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियों में काम कर रहे हैं. यदि यही प्रतिभा भारत के लिए काम करे, तो देश डिजिटल महाशक्ति बन सकता है.

इन्वेस्टर्स को आगे आना होगा
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किसी भी बड़े परिवर्तन के लिए पूंजी की आवश्यकता होती है. इसलिए देश के उद्योगपतियों और इन्वेस्टर्स की जिम्मेदारी भी बहुत महत्वपूर्ण है. उन्हें यह समझना होगा कि स्वदेशी सॉफ्टवेयर और टेक्नोलॉजी में निवेश केवल देशभक्ति नहीं, बल्कि भविष्य का सबसे लाभदायक निवेश भी है.
आने वाले समय में डाक्यूमेंट, प्रजेंन्टेशन एप, AI, सॉफ्टवेयर, डिजिटल प्लेटफॉर्म और डेटा आधारित कंपनियाँ ही विश्व अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करेंगी. यदि भारतीय इन्वेस्टर्स आज भारतीय स्टार्टअप्स और सॉफ्टवेयर कंपनियों में निवेश करेंगे, तो भविष्य में उन्हें अत्यधिक आर्थिक लाभ प्राप्त होगा.
देश के निवेशकों को चाहिए कि वे —
भारतीय टेक स्टार्टअप्स को फंड दें
युवा इंजीनियरों को रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए सहयोग करें
स्वदेशी ऐप और प्लेटफॉर्म बनाने वाली कंपनियों में निवेश करें
विदेशी कंपनियों की नकल करने के बजाय भारतीय नवाचार को बढ़ावा दें
यह निवेश केवल व्यापार नहीं होगा, बल्कि भारत के भविष्य को मजबूत बनाने का कार्य होगा।

तकनीकी क्षेत्र आत्मनिर्भर भारत की दिशा
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“मेक इन इंडिया” और “स्टार्टअप इंडिया” जैसे अभियान तभी पूरी तरह सफल होंगे जब भारत तकनीक और सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बनेगा. यदि देश को आर्थिक रूप से मजबूत, सुरक्षित और समृद्ध बनाना है, तो प्रत्येक क्षेत्र में स्वदेशी पर जोर देना होगा।
जिस प्रकार हम स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने की बात करते हैं, उसी प्रकार हमें स्वदेशी डिजिटल प्लेटफॉर्म और सॉफ्टवेयर को भी अपनाना होगा, यह केवल तकनीकी आवश्यकता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आवश्यकता है. सरकार के साथ साथ इन्वेस्टर्स को विचार करना चाहिए.

विदेशी सॉफ्टवेयर का खतरा
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अगर कभी भारत के सम्बंध अमेरिका से खराब हो जाए और अमेरिका भारत को सॉफ्टवेयर सर्विस देने से मना कर दे तो भारत में त्राहि त्राहि मच जायेगी और अमेरिकी सरकार का जो रुख है उसे देखते हुए लगता है कि वह समय अब बहुत दूर भी नहीं है.
निष्कर्ष
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भारत के पास प्रतिभा है, बाजार है, युवा शक्ति है और अवसर भी है. अब आवश्यकता है संकल्प की. देश के युवा इंजीनियरों को नए स्वदेशी ऐप और सॉफ्टवेयर बनाने के लिए आगे आना होगा और देश के निवेशकों को इन प्रयासों में खुलकर निवेश करना होगा.
यदि भारत ने तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त कर ली, तो आने वाले वर्षों में भारत केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि दुनिया को तकनीक देने वाला नेतृत्वकर्ता राष्ट्र बनेगा. यही “स्वदेशी अपनाओ”, “स्टार्टअप इंडिया” और “मेक इन इंडिया” का वास्तविक उद्देश्य भी है.
मेरा बेटे ने भी इसी सोंच के साथ इनिसिएटिव लिया है और अपनी खुद की कम्पनी CPG Technologies (P) Ltd. बनाई है और एक टीम बनाकर इस क्षेत्र में काम कर रहा है. अभी उसकी शुरुआत है, आप सब का आशीर्वाद रहा तो वह अपने लक्ष्य को पाने में अवश्य सफल होगा

Saturday, 22 November 2025

संघ गीत : हे जन्म-भूमि भारत

हे जन्म-भूमि, हे कर्म भूमि भारत

हे वन्दनीय भारत, अभिनन्दनीय भारत।।

जीवन सुमन चढ़ाकर आराधना करेंगे

तेरा जन्म-जन्म भर हम वन्दना करेंगे।

हम अर्चना करेंगे, हे जन्म-भूमि भारत

हे जन्म-भूमि भारत, हे कर्म भूमि भारत।। 


महिमा महान् तू है, गौरव निधान तू है

तू प्राण है हमारी, जननी समान तू है

तेरे लिये जियेंगे, तेरे लिये मरेंगे

तेरे लिये जन्म भर, हम साधना करेंगे

हम अर्चना करेंगे, हे जन्म-भूमि भारत

हे जन्म-भूमि भारत, हे कर्म भूमि भारत।। 


जिनका मुकुट हिमालय, जग जगमगा रहा है

सागर जिसे रतन की, अंजुलि चढ़ा रहा है

वह देश है हमारा, ललकार कर कहेंगे

उस देश के बिना हम, जीवित नहीं रहेंगे

हम अर्चना करेंगे, हे जन्म-भूमि भारत

हे जन्म-भूमि भारत, हे कर्म भूमि भारत।। 


जो संस्कृति अभी तक दुर्जय सी बनी है

जिसका विशाल मन्दिर, आदर्श का धनी है

उसकी विजय-ध्वजा ले, हम विश्व में चलेंगे

संस्कृति सुरभि पवन, बन हर कुञ्ज में बहेंगे

हम अर्चना करेंगे, हे जन्म-भूमि भारत

हे जन्म-भूमि भारत, हे कर्म भूमि भारत।। 


शाश्वत स्वतन्त्रता का,जो दीप जल रहा है

आलोक का पथिक जो, अविराम चल रहा है

विश्वास है कि पल भर, रुकने उसे न देंगे

उस दीप की शिखा को, ज्योतित सदा रखेंगे

हम अर्चना करेंगे, हे जन्म-भूमि भारत

हे जन्म-भूमि भारत, हे कर्म भूमि भारत।। 

संघ गीत : मनुष्य तू बड़ा महान है

 मनुष्य तु बड़ा महान है, भूल मत मनुष्य तू बड़ा महान है।।

धरती की शान तू है,
मनु की संतान,
तेरी मुठ्ठियों मे बंद तूफान है रे,
मनुष्य तू बडा महान है,
मनुष्य तु बड़ा महान है, भूल मत मनुष्य तू बड़ा महान है।।

तू जो चाहे पर्वत पहाडो को फोड दे,
तू जो चाहे नदियों के मुख को भी मोड दे,
तू जो चाहे पर्वत पहाडो को फोड दे,
तू जो चाहे नदियों के मुख को भी मोड दे,
तू जो चाहे माटी से अमृत निचोड़ दे,
तू जो चाहे धरती को अंबर से जोड दे,
अमर तेरे प्राण अमर तेरे प्राण,
मिला तुझको वरदान,
तेरी आत्मा मे स्वयं भगवान है,
तेरी आत्मा मे स्वयं भगवान है रे,
मनुष्य तु बड़ा महान है, भूल मत मनुष्य तू बड़ा महान है।।

नैनो मे ज्वाल तेरी गत मे भुचाल,
तेरी छाती मे छुपा महाकाल है,
नैनो मे ज्वाल तेरी गत मे भुचाल,
तेरी छाती मे छुपा महाकाल है,
पृथ्वी के लाल तेरी हिमगिरि सा भाग,
तेरी भ्रकुटी मे तांडव का ताल है,
निज को तू जान निज को तू जान,
जरा शक्ति पहचान,
तेरी वाणी में ओ तेरी वाणी मे,
युग का अहवान है रे,
मनुष्य तु बड़ा महान है, भूल मत मनुष्य तू बड़ा महान है।।

धरती सा भी तू है अग्नि सा भी,
तू जो चाहे काल को भी थाम ले,
धरती सा भी तू है अग्नि सा भी,
तू जो चाहे काल को भी थाम ले,
पापो का प्रलय रूके पशुता का शिश झुके,
तू जो चाहे हिम्मत से काम ले,
गुरू सा मतीमान गुरू सा मतीमान,
पवन सा गतीमान,
तेरी नभ से भी ऊंची उडान है,
ओ तेरी नब से भी ऊंची उडान है रे,
मनुष्य तु बड़ा महान है, भूल मत मनुष्य तू बड़ा महान है।।

धरती की शान तू है, मनु की संतान,
तेरी मुठ्ठियों मे बंद तूफान है रे,
मनुष्य तु बड़ा महान है, भूल मत मनुष्य तू बड़ा महान है।।

संघ गीत : जो अपने देश धर्म कौम, दे रखवाले हुंदे ने

 जो अपने देश धर्म कौम दे, रखवाले हुंदे ने

ओह जीवन सफले हुंदे ने, ओह भागां वाले हुंदे ने ।।


नही रुकदे नही झुकदे, 

नही थकदे नही अकदे

कोई बी भैय या परलोभन, 

ओहनां नू तोड़ नहीं सकदे

वतन दिया साधकां तन मन, ऐसे ढाले हुंदे ने

ओह जीवन सफले हुंदे ने, ओह भागां वाले हुंदे ने


जो अपने देश धर्म कौम दे, रखवाले हुंदे ने

ओह जीवन सफले हुंदे ने, ओह भागां वाले हुंदे ने ।।



उबलदिआं देगां, तत्तीआं तवीआं, 

आरे, रंबीआं, चरखडीआं

जो सच्च दी राह चलदे ने, 

मुश्किलां आऊंदीआं बडींआं

कदे फाँसी, कदे गोली, कदे विष प्याले हुंदे ने

ओह जीवन सफले हुंदे ने, ओह भागां वाले हुंदे ने


जो अपने देश धर्म कौम दे, रखवाले हुंदे ने

ओह जीवन सफले हुंदे ने, ओह भागां वाले हुंदे ने ।।


धनी उन्हां जिन्हा कोई 

नही हुंदा जमाने विच

सिदकदिलियां जुझारूपन है, 

जिन्हां दे खजाने विच

जिन्हा ने शील – संयम, चाल – चलन सम्भाले हुंदे ने

ओह जीवन सफले हुंदे ने, ओह भागां वाले हुंदे ने


जो अपने देश धर्म कौम दे, रखवाले हुंदे ने

जो अपने देश धर्म कौम दे, रखवाले हुंदे ने

संघ गीत : ऐ हिन्द तेरी शान तों जाना लुटावांगे

ऐ हिन्द तेरी शान तों, जानां लुटावांगे।

दुनियां नू तेरी रक्खिया, कर के विखावांगे॥

ऐ हिन्द तेरी शान तों, जानां लुटावांगे।

दुनियां नू तेरी रक्खिया, कर के विखावांगे॥


बन्दे ने धरम रक्खिया, जीवन नू वार के,

दसवें पिता ने दस्सिया, सरवंश वार के.

रक्खी सी लाज धरम दी, अजीत जुझार ने

साडे वी सीनियां दे विच, उठ दे उबाल ने

असी लाडले दशमेश दे बण के विखांवांगे,

नियां नू तेरी रक्खिया, कर के विखावांगे॥

ऐ हिन्द तेरी शान तों, जानां लुटावांगे।

दुनियां नू तेरी रक्खिया, कर के विखावांगे॥


जालिम ने भगत सिंह नू, फांसी चढ़ा दित्ता

भारत दा शेर , आखरी नींदे सुला दित्ता

पर ओह तां हस्स के, देश तों कुरबान हों गिआ

परवानां अपणी कौम तों, बलिदान हो गिआ

कुरबानीयां दा पाठ वी , दिल नूं पढ़ावांगे

दुनियां नू तेरी रक्खिया , कर के विखावांगे॥

ऐ हिन्द तेरी शान तों, जानां लुटावांगे।

दुनियां नू तेरी रक्खिया, कर के विखावांगे॥


चमकी जो बिजली वांग , ओह झांसी दी रानी सी

जननी दे प्यार विच , जो होई दीवानी सी

दुश्मन दे मार मार के, छक्के छुड़ाए सी

घानां दे घान मार के , धरती ते लाहे सी

प्रचण्ड ओस चण्डी नूं , करके विखावांगे

दुनियां नू तेरी रक्खिया. कर के विखावांगे॥

ऐ हिन्द तेरी शान तों, जानां लुटावांगे।

दुनियां नू तेरी रक्खिया, कर के विखावांगे॥


राणा ने उमर जंगलां दे, विच गुजारी सी

खातर धर्म ते देश दे , जिन्दड़ी वी वारी सी

शिवा ने मां तों सिक्खिया , कुरबान होवना

प्यारे धर्म ते देश तों बलिदान हो वना

सारे जग ते फेर तों , भगवा लहरावांगे

दुनियां नू तेरी रक्खिया कर के विखावांगे॥

ऐ हिन्द तेरी शान तों, जानां लुटावांगे।

दुनियां नू तेरी रक्खिया, कर के विखावांगे॥

संघ गीत : चरैवेति-चरैवेति, यही तो मंत्र है अपना

चरैवेति-चरैवेति

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चरैवेति-चरैवेति, यही तो मंत्र है अपना ।

चरैवेति-चरैवेति, यही तो मंत्र है अपना ॥

नहीं रुकना, नहीं थकना, 

सतत चलना सतत चलना ।

यही तो मंत्र है अपना, 

शुभंकर मंत्र है अपना ॥

चरैवेति-चरैवेति, यही तो मंत्र है अपना ।

चरैवेति-चरैवेति, यही तो मंत्र है अपना ।


हमारी प्रेरणा भास्कर, 

है जिनका रथ सतत चलता।

युगों से कार्यरत है जो, 

सनातन है प्रबल ऊर्जा।

गति मेरा धरम है जो, 

भ्रमण करना भ्रमण करना।

यही तो मंत्र है अपना, 

शुभंकर मंत्र है अपना 

चरैवेति-चरैवेति, यही तो मंत्र है अपना ।

चरैवेति-चरैवेति, यही तो मंत्र है अपना ॥१॥


हमारी प्रेरणा माधव, 

है जिनके मार्ग पर चलना।

सभी हिन्दू सहोदर हैं, 

ये जन-जन को सभी कहना।

स्मरण उनका करेंगे और, 

समय दे अधिक जीवन का।

यही तो मंत्र है अपना, 

शुभंकर मंत्र है अपना 

चरैवेति-चरैवेति, यही तो मंत्र है अपना ।

चरैवेति-चरैवेति, यही तो मंत्र है अपना ॥२॥


हमारी प्रेरणा भारत, 

है भूमि की करें पूजा।

सुजल-सुफला सदा स्नेहा, 

यही तो रूप है उसका।

जिएं माता के कारण हम, 

करें जीवन सफल अपना।

यही तो मंत्र है अपना, 

शुभंकर मंत्र है अपना 

चरैवेति-चरैवेति, यही तो मंत्र है अपना ।

चरैवेति-चरैवेति, यही तो मंत्र है अपना ॥३॥


नहीं रुकना, नहीं थकना, 

सतत चलना सतत चलना ।

यही तो मंत्र है अपना, 

शुभंकर मंत्र है अपना ॥

चरैवेति-चरैवेति, यही तो मंत्र है अपना ।

चरैवेति-चरैवेति, यही तो मंत्र है अपना ॥

संघ गीत : हम करें राष्ट्र आराधन

 हम करें राष्ट्र-आराधन, 

हम करें राष्ट्र-आराधन,

तन से, मन से, धन से, 

तन-मन-धन जीवन से

हम करें राष्ट्र-आराधन,

हम करें राष्ट्र आराधन ।। 1।।


अंतर से मुख से कृति से, 

निश्चल हो निर्मल मति से,

श्रद्धा से मस्तक नत से, 

हम करें राष्ट्र अभिवादन

हम करें राष्ट्र आराधन

हम करें राष्ट्र आराधन ।। 2 ।।


अपने हँसते शैशव से, 

अपने खिलते यौवन से,

प्रौढ़तापूर्ण जीवन से, 

हम करें राष्ट्र का अर्चन

हम करें राष्ट्र आराधन

हम करें राष्ट्र आराधन ।। 3 ।।


अपने अतीत को पढ़कर, 

अपना इतिहास उलटकर,

अपना भवितव्य समझकर, 

हम करें राष्ट्र का चिंतन

हम करें राष्ट्र आराधन

हम करें राष्ट्र आराधन ।। 4 ।।


हमने ही उसे दिया था, 

सांस्कृतिक उच्च सिंहासन,

माँ जिस पर बैठी सुख से, 

करती थी जग का शासन,

हम करें राष्ट्र आराधन

हम करें राष्ट्र आराधन ।। 5 ।।


अब कालचक्र की गति से, 

वह टूट गया सिंहासन

अपना तन-मन-धन देकर 

हम करें पुनः संस्थापन

हम करें राष्ट्र आराधन

हम करें राष्ट्र आराधन ।। 6 ।।