आज दुनिया डिजिटल युग में प्रवेश कर चुकी है. मोबाइल ऐप, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन गेम, वीडियो प्लेटफॉर्म और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी तकनीकें केवल सुविधा का माध्यम नहीं रहीं, बल्कि वे किसी भी देश की आर्थिक और रणनीतिक शक्ति का आधार बन चुकी हैं.
ऐसे समय में भारत के लिए यह आवश्यक हो गया है कि वह विदेशी सॉफ्टवेयर और ऐप्स पर निर्भर रहने के बजाय अपने स्वदेशी सॉफ्टवेयर और डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करे. इस कार्य में युवा इंजीनियर्स और इन्वेस्टर्स दोनों को आगे आना होगा क्योंकि प्रतिभा के साथ पैसा भी जरूरी है.
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने “स्टार्टअप इंडिया”, “मेक इन इंडिया” और “स्वदेशी अपनाओ” जैसे अभियानों के माध्यम से देश को आत्मनिर्भर बनाने का आह्वान किया है. इन अभियानों का वास्तविक उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि भारत को तकनीकी रूप से भी विश्व में अग्रणी बनाना है.
क्यों जरूरी है स्वदेशी सॉफ्टवेयर ?
********************************
आज भारत में करोड़ों लोग विदेशी सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैं. इन सभी से होने वाली भारी कमाई विदेशी कंपनियों के पास जाती ही है, साथ ही भारत के लोगों का सारा डाटा भी इन विदेशी कंपनियों के पास पहुँच जाता है, जिसका दुरूपयोग हो सकता है.
चाहे बात फेसबुक जैसी सोशल नेटवर्किंग सेवाओं की हो, व्हाट्सएप जैसे मैसेजिंग ऐप की, यू-ट्यूब जैसे वीडियो प्लेटफॉर्म की या ऑनलाइन गेम्स की, ..... इन सभी सोशल मीडिया प्लेटफार्म के पास आज लगभग हर भारतीय का सारा डाटा है, जिसको पैसे के लिए भारत के शत्रुओं को बेचा जा सकता है.
यदि भारत के युवा इंजीनियर किसी प्रकार के स्वदेशी विकल्प तैयार करें, तो इससे कई बड़े लाभ होंगे —
देश का पैसा देश में ही रहेगा
लाखों युवाओं को रोजगार मिलेगा
भारत तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनेगा
डेटा सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी
विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम होगी
आज चीन इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. चीन ने विदेशी ऐप्स के विकल्प तैयार किए और अपने देश की कंपनियों को बढ़ावा दिया. परिणामस्वरूप आज उसकी कई टेक कंपनियाँ विश्व की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल हैं और चीन के निवासियों का डाटा भी सुरक्षित है.
भारत के पास चीन से भी अधिक युवा शक्ति और प्रतिभा मौजूद है. आवश्यकता केवल सही दिशा और समर्थन की है. हर वर्ष लाखों इंजीनियर कॉलेजों से निकलते हैं. लेकिन कोई इन्वेस्टर पैसा लगाने को तैयार नहीं है. इनके माँ बाप भी यही कहते हैं कि कहीं नौकरी कर लो.
यदि इन युवाओ को घर के साथ साथ सरकार और इन्वेस्टर्स का भी साथ मिल जाए तो ये युवा, नौकरी खोजने के बजाय, नए सॉफ्टवेयर, ऐप और डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं, और तकनीक के क्षेत्र में भारत को विश्वगुरु बना सकते हैं.
आज आवश्यकता है कि भारतीय युवा —
स्वदेशी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म विकसित करें
भारतीय संस्कृति और शिक्षा आधारित गेम तैयार करें
वीडियो शेयरिंग और मैसेजिंग ऐप्स बनाएं
भारतीय भाषाओं पर आधारित AI और सॉफ्टवेयर विकसित करें
साइबर सुरक्षा और क्लाउड टेक्नोलॉजी में स्वदेशी समाधान तैयार करें
भारत के पास प्रतिभा की कोई कमी नहीं है. हमारे इंजीनियर दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियों में काम कर रहे हैं. यदि यही प्रतिभा भारत के लिए काम करे, तो देश डिजिटल महाशक्ति बन सकता है.
इन्वेस्टर्स को आगे आना होगा
****************************
किसी भी बड़े परिवर्तन के लिए पूंजी की आवश्यकता होती है. इसलिए देश के उद्योगपतियों और इन्वेस्टर्स की जिम्मेदारी भी बहुत महत्वपूर्ण है. उन्हें यह समझना होगा कि स्वदेशी सॉफ्टवेयर और टेक्नोलॉजी में निवेश केवल देशभक्ति नहीं, बल्कि भविष्य का सबसे लाभदायक निवेश भी है.
आने वाले समय में डाक्यूमेंट, प्रजेंन्टेशन एप, AI, सॉफ्टवेयर, डिजिटल प्लेटफॉर्म और डेटा आधारित कंपनियाँ ही विश्व अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करेंगी. यदि भारतीय इन्वेस्टर्स आज भारतीय स्टार्टअप्स और सॉफ्टवेयर कंपनियों में निवेश करेंगे, तो भविष्य में उन्हें अत्यधिक आर्थिक लाभ प्राप्त होगा.
देश के निवेशकों को चाहिए कि वे —
भारतीय टेक स्टार्टअप्स को फंड दें
युवा इंजीनियरों को रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए सहयोग करें
स्वदेशी ऐप और प्लेटफॉर्म बनाने वाली कंपनियों में निवेश करें
विदेशी कंपनियों की नकल करने के बजाय भारतीय नवाचार को बढ़ावा दें
यह निवेश केवल व्यापार नहीं होगा, बल्कि भारत के भविष्य को मजबूत बनाने का कार्य होगा।
तकनीकी क्षेत्र आत्मनिर्भर भारत की दिशा
****************************************
“मेक इन इंडिया” और “स्टार्टअप इंडिया” जैसे अभियान तभी पूरी तरह सफल होंगे जब भारत तकनीक और सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बनेगा. यदि देश को आर्थिक रूप से मजबूत, सुरक्षित और समृद्ध बनाना है, तो प्रत्येक क्षेत्र में स्वदेशी पर जोर देना होगा।
जिस प्रकार हम स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने की बात करते हैं, उसी प्रकार हमें स्वदेशी डिजिटल प्लेटफॉर्म और सॉफ्टवेयर को भी अपनाना होगा, यह केवल तकनीकी आवश्यकता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आवश्यकता है. सरकार के साथ साथ इन्वेस्टर्स को विचार करना चाहिए.
विदेशी सॉफ्टवेयर का खतरा
***************************
अगर कभी भारत के सम्बंध अमेरिका से खराब हो जाए और अमेरिका भारत को सॉफ्टवेयर सर्विस देने से मना कर दे तो भारत में त्राहि त्राहि मच जायेगी और अमेरिकी सरकार का जो रुख है उसे देखते हुए लगता है कि वह समय अब बहुत दूर भी नहीं है.
निष्कर्ष
*******
भारत के पास प्रतिभा है, बाजार है, युवा शक्ति है और अवसर भी है. अब आवश्यकता है संकल्प की. देश के युवा इंजीनियरों को नए स्वदेशी ऐप और सॉफ्टवेयर बनाने के लिए आगे आना होगा और देश के निवेशकों को इन प्रयासों में खुलकर निवेश करना होगा.
यदि भारत ने तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त कर ली, तो आने वाले वर्षों में भारत केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि दुनिया को तकनीक देने वाला नेतृत्वकर्ता राष्ट्र बनेगा. यही “स्वदेशी अपनाओ”, “स्टार्टअप इंडिया” और “मेक इन इंडिया” का वास्तविक उद्देश्य भी है.
मेरा बेटे ने भी इसी सोंच के साथ इनिसिएटिव लिया है और अपनी खुद की कम्पनी CPG Technologies (P) Ltd. बनाई है और एक टीम बनाकर इस क्षेत्र में काम कर रहा है. अभी उसकी शुरुआत है, आप सब का आशीर्वाद रहा तो वह अपने लक्ष्य को पाने में अवश्य सफल होगा